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तू सुमिरन कर ले मेरे मना, तेरी बीती उमर हरि नाम बिना ।। पंछी पंख बिन, हस्ती दन्त बिन, नारी पुरुष बिना । वेश्या पुत्र पिता बिन हीना, तैसे प्राणी हरि नाम बिना ।। देह नैन बिन, रैन चन्द्र बिन, धरती मेघ बिना । जैसे पंडित वेद बिहूना, तैसे प्राणी हरि नाम बिना ।। कूप निर बिनु, धनु छीर बिन, मंदि…
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ऊधो मोहे संत सदा अति प्यारे
ऊधो मोहे संत सदा अति प्यारे | जाकि महिमा वेद उचारे || मेरे कारण छोड जगत के भोग पदारथ सा…
ये जग अंधा मै केही समझाऊं
ये जग अंधा मै केही समझाऊं ।। एक दो होय उन्हें समझाऊं, सभी भुलाना पेट का धंधा ।। पानी के…
पंख नहीं पास कैसे...
शब्द नहीं पास कैसे, विनय सुनाऊं मैं। पंख नहीं पास कैसे, पास चली आऊं मैं ॥ ऐसा कोई त्याग…
हरि भजन बिना सुख नाहीं
हरि भजन बिना सुख नाहीं रे । नर क्यों बिरथा भटकाई रे ।। काशी गया द्वारका जावे, चार धाम …
गुरु की मूरत मन में ध्याना
गु रु की मूरत मन में ध्याना। गुरु के शब्द मंतर मन माना॥ गुरु के चरण हृदय लै धारो। गुरु पा…