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गुरु की मूरत मन में ध्याना

गु रु की मूरत मन में ध्याना। गुरु के शब्द मंतर मन माना॥ गुरु के चरण हृदय लै धारो। गुरु पारब्रह्म सदा नमस्कारो॥ मत कोई भरम भूलो संसारी। गुरु बिन कोई न उतरसि पारी॥ भूले को गुरु मारग पाया। अवर तियाग हरि भक्ति लाया॥ जन्म मरण की त्रास मिटाई। गुरु पूरे की बे-अंत बड़ाई॥ जिन्ह पाया तिन्ह गुरु ते …

तू सुमिरन कर ले मेरे मना

तू सुमिरन कर ले मेरे मना, तेरी बीती उमर हरि नाम बिना ।। पंछी पंख बिन, हस्ती दन्त बिन, नारी पुरुष बिना । वेश्या पुत्र पिता बिन हीना, तैसे प्राणी हरि नाम बिना ।। देह नैन बिन, रैन चन्द्र बिन, धरती मेघ बिना । जैसे पंडित वेद बिहूना, तैसे प्राणी हरि नाम बिना ।। कूप निर बिनु, धनु छीर बिन, मंदि…